ओडिशा

ACF सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में बिद्या भारती को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

Kavita2
30 Sept 2026 4:40 PM IST
ACF सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में बिद्या भारती को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
x

ओडिशा। ओडिशा के चर्चित ACF सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में उनकी पत्नी बिद्या भारती पांडा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने ओडिशा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप से इनकार के बाद हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा और मामले में आगे की आपराधिक कार्यवाही जारी रह सकती है।

बिद्या भारती पांडा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख उस समय किया था जब ओडिशा हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग भी की थी, लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट में उनकी विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने सुनवाई की।

यह पूरा मामला Assistant Conservator of Forests सौम्य रंजन महापात्रा की मौत से जुड़ा है। वह गजपति जिले के परलाखेमुंडी में ACF के पद पर तैनात थे। जुलाई 2021 में वह अपने सरकारी आवास पर गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें इलाज के लिए कटक ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।

सौम्य रंजन की मौत के बाद मामला रहस्यमय परिस्थितियों को लेकर चर्चा में आया था। उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि उनकी मौत साधारण दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का मामला है। परिवार की ओर से पत्नी बिद्या भारती, तत्कालीन DFO संग्राम केशरी बेहरा और रसोइए मनमथ कुंभा पर आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद इसे दुर्घटनात्मक मौत माना और बिद्या भारती के खिलाफ लापरवाही से जुड़े प्रावधानों के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

इसके बाद मामला निचली अदालत तक पहुंचा। अदालत की ओर से बिद्या भारती समेत अन्य संबंधित लोगों को पेश होने के निर्देश दिए गए। इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला हाई कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां से भी उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।

ओडिशा हाई कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बिद्या भारती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को शीर्ष अदालत ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि निचली अदालत में लंबित आपराधिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि केवल याचिका खारिज होने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की अंतिम सच्चाई और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्णय ट्रायल और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

इस मामले में रसोइए मनमथ कुंभा के खिलाफ भी अदालत की ओर से कार्रवाई हुई है। बुधवार को पुलिस ने उसे उसके पैतृक गांव से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ परलाखेमुंडी के SDJM कोर्ट की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

मनमथ कुंभा की गिरफ्तारी और बिद्या भारती की याचिका खारिज होने से मामले में एक ही दिन दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। पुलिस और अदालत की आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजर रहेगी।

सौम्य रंजन की मौत के बाद उनके परिजनों ने लगातार निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। परिवार की ओर से हत्या और साजिश का आरोप लगाया गया, जबकि क्राइम ब्रांच की जांच का निष्कर्ष इससे अलग रहा।

यही वजह है कि यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। अलग-अलग स्तर पर जांच रिपोर्ट, अदालत के आदेश और आरोपियों की भूमिका को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी रहा है कि सौम्य रंजन सरकारी आवास पर कैसे झुलसे और आग लगने की परिस्थितियां क्या थीं। जांच एजेंसियों ने इस पहलू पर पहले ही जांच की थी, लेकिन परिवार ने जांच के निष्कर्षों पर सवाल उठाए।

अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हस्तक्षेप से इनकार के बाद निचली अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और आरोपों के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोप साबित करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष को अपनी दलील और साक्ष्य पेश करने का पूरा अवसर मिलेगा।

बिद्या भारती की याचिका खारिज होने से हाई कोर्ट का पूर्व आदेश बरकरार रहेगा। इसका मतलब यह भी है कि केवल शीर्ष अदालत में मामला ले जाने के आधार पर निचली अदालत की प्रक्रिया रुकेगी नहीं।

यह मामला 2021 से लगातार चर्चा में है और कई बार नए घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले का फोकस दोबारा ट्रायल और निचली अदालत की कार्यवाही पर आ गया है।

फिलहाल बिद्या भारती को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी और आगे की स्थिति निचली अदालत में होने वाली सुनवाई से स्पष्ट होगी।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के मामले में यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया है। अब अदालत में आरोपों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

Next Story